4 टिप्स से बच्‍चों के मुंह की करें केयर (4 tips se bachho ke muh ki kare care)


मुंह को स्वस्थ्य बनाए रखना भी अच्छी हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है। बड़ी तादाद में लोग दांतों और मसूड़ों की समस्याओं से जूझते नजर आते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है मुंह ठीक से साफ नहीं करना। आज के समय में ज्यादातर लोग कैविटी, मसूड़ों की बीमारी, सांसों की बदबू और कुछ सामान्य दांत की समस्याओं से पीड़ित हैं।

मुंह से जुड़ी समस्याओं की रोकथाम बपन से ही शुरू कर देनी चाहिए। आपको अपने बच्चे के जीवन में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए कम उम्र से ही दांतों की देखभाल करनी चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए आपके जीवन में जितना महत्व हेल्दी फूड का होता है, उतना ही महत्व ओरल हाइजीन का भी होता है।

अक्सर अभिभावक अपने बच्चे के ओरल हेल्थ को नजरअंदाज कर देते हैं और आगे चलकर यही गंभीर बीमारियों को बढ़वा देता है। आइए जानते हैं इन समस्याओं को रोकने के आसान 4 उपाय।

 

1. बचपन से ही दांतों का चेकअप करवाएं -

कैविटी से अपने बच्चों को दूर रखने के लिए दांतों की नियमित जांच बहुत जरूरी है। दांतों के डॉक्टर से नियमित रूप से दांतों की चेकअप करवाएं। कैविटी होने का इंतजार न करें। जाए। जैसे ही उसका पहला दाँत दिखाई दे, अपने बच्चे को एक दंत चिकित्सक के पास ले जाएं। बच्चे के ओरल हेल्थ का प्रारंभिक निवारक आपका पैसा और देखभाल का समय दोनों बचाता है।

2. बच्चे के मुंह की सफाई पर दें ध्यान -

अपने बच्चे के मुंह को हर बार खाने के बाद अच्छे से साफ करें। अगर बच्चे को दांत नहीं भी हैं तो उन्हें खिलाने के बाद हर बार मसूड़ों को अच्छे से पोंछें। आप अपने नवजात के नाजुक मसूड़ों को साफ करने के लिए अपनी उंगली के चारों ओर गीले कपड़े लपेटे कर ध्यान से पोंछें।

उनके मसूड़ों पर अधिक दबाव न डालें। जैसे ही आपके बच्चे के दांत आ जाते हैं तो दिन में कम से कम दो बार हल्के टूथपेस्ट से ब्रश कराएं। बच्‍चों के दांतों को साफ करने के लिए हमेशा मुलायम टूथब्रश का ही इस्तेमाल करें। साथ ही बार-बार खाने के बाद कुल्ला कराएं।

3. सोते समय बच्चे को दूध की बोतल न दें -

जब आपका बच्चा सोने वाला हो तो उसे दूध से भरी बोतल न दें। चीनी से भरे तरल पदार्थ उनके दांतों पर चिपक जाएंगे और इससे उनके दांत सड़ सकते हैं। आप अपने बच्चे को बिस्तर पर पानी से भरा बोतल दे सकते हैं। उन्हें इसकी आदत न लगाएं। आपको बता दें कि इस तरह की आदत से उनके दांतों का आकार भी बदल सकता है।

4. रात को मीठी दवाइयों से दूर रखें -

बच्चों की दवाइयां आमतौर पर मीठी होती हैं। बच्चा जब इन प्रकार की दवाइयों को खाता है तो वो दांतों और मसूड़ों पर चिपक जाती हैं। इससे कैविटी होने की संभावना बढ़ जाती है।

अस्थमा और दिल की समस्याओं जैसी बीमारियों की दवा लेने वाले बच्चों में अक्सर दांत सड़ने की परेशानी देखी जाती है। यदि आपका बच्चा लंबे समय तक ऐसी दवाइयां ले रहा है तो आपको दांत के डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।


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