कैंसर (Cancer in Hindi)


कैंसर क्या है?

आपका शरीर कई तरह की कोशिकाओं से बना है। जब शरीर को इनकी ज़रूरत होती है उसी तरह से ये कोशिकाएं विभाजित होने लगती है और बढ़ती रहती हैं। लेकिन  शरीर को इन कोशिकाओं की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी ये कोशिकाएं बढ़ती रहती हैं। ऐसे में इन कोशिकाओं का असामान्य विकास कैंसर कहलाता है। इसमें कोशिकाओं अपना सामान्य नियंत्रण खोने लगती हैं।

कैंसर के प्रकार – 

कैंसर कई प्रकार के होते हैं, उनमें से कुछ यह है - ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, मुँह का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, गर्भाशय कैंसर, लंग कैंसर, पेट का कैंसर, बोन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, ओवेरियन कैंसर, ब्लड कैंसर आदि।

कैंसर के लक्षण –

1. दर्द - कुछ कैंसर में पहले आपको दर्द नहीं होता है, लेकिन कुछ कैंसर का पहला लक्षण दर्द हो सकता है जैसे ब्रेन ट्यूमर में, इसमें आपको सिरदर्द होता है.

2. ब्लीडिंग - कैंसर में आपको थोड़ा खून आ सकता है क्योंकि ऐसे में रक्त वाहिकाएं नाजुक हो जाती हैं। बाद में जब कैंसर बढ़ता है तो ब्लीडिंग बढ़ भी सकती है।

3. रक्त का थक्का जमना - कुछ कैंसर में पदार्थों का उत्पादन होता है जिससे शरीर में रक्त का थक्का जमने लगता है खासकर पैरों की नसों में।

4. वेट लॉस और थकान - आमतौर पर, कैंसर से पीड़ित व्यक्ति का वजन घटना और थकान होना आम है, जिसकी वजह से ये समस्या कैंसर की वजह से और भी खराब हो सकती है।

5. सांस लेने में दिक्कत - कैंसर से पीड़ित व्यक्ति के फेफड़ों में वायुमार्ग जैसी संरचनाएं संकुचित और अवरुद्ध हो सकती हैं जिससे सांस लेने में दिक्कत, खांसी या निमोनिया आदि हो सकते हैं।

इसके अलावा लिम्फ नोड्स में सूजन, न्यूरोलॉजिक और मस्कुलर लक्षण आदि देखने को मिल सकते हैं।

कैंसर के कारण –

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर के कारक निम्नलिखित हैं :

1. आनुवांशिक

2. उम्र से संबंधित

3. पर्यावरणीय कारक

4. खराब आहार का सेवन है

5. दवाएं और चिकित्सा उपचार

6. इंफेक्शन

7. सूजन संबंधी विकार

8. ख़राब प्रतिरक्षा प्रणाली

कैंसर के बचाव –

कैंसर की रोकथाम के लिए निम्नलिखित तरीके हैं –

1. अगर आप धूम्रपान करते हैं तो उसे अभी छोड़ दें और नहीं करते हैं तो उसे शौक-शौक में पीना शुरू न करें। क्योंकि इससे न सिर्फ फेफड़ों का कैंसर होता है बल्कि अन्य कैंसर भी होते हैं।

2. आपने पैराबैंगनी किरणों के बारे में तो सुना होगा तो कैंसर की रोकथाम के लिए ज्यादा धुप में न रहें और अगर किसी काम की वजह से रहना भी पड़ता ही तो त्वचा पर सनस्क्रीन या पूरे कपड़े पहनें।

3. कैंसर से बचने के लिए अपनी डाइट पर भी ध्यान दें। रोजाना फलों और सब्जियों से समृद्ध आहार खाएं। साबुत अनाज और बिना फैट वाले प्रोटीन का चयन करें।

4. अगर आप व्यायाम नहीं करते हैं तो आज से नियमित रूप से व्यायाम करना शुरू कर दें। इस तरह आप कैंसर की संभावना को कम कर सकते हैं।

5. अधिक वजह से भी कैंसर हो सकता है तो कोशिश करें की आपका वजन हमेशा नियंत्रित रहे और अगर नहीं है तो अपनी डाइट पर ध्यान दें और रोज आधे घंटे व्यायाम करें।

6. अन्य बचाव जैसे शराब का सेवन न करें।

कैंसर टेस्ट –

1. शारीरिक टेस्ट - डॉक्टर आपके शरीर की जांच करेंगे जिसमें वो गांठ को महसूस करेंगे, ऐसे में ट्यूमर का पता चलेगा। टेस्ट में वो शरीर में होने वाले परिवर्तन देख सकते हैं जैसे त्वचा के रंग में बदलाव या अंग का बढ़ना।

2. लेबोरेटरी टेस्ट - डॉक्टर कैंसर की पहचान करने के लिए पेशाब और रक्त का परीक्षण कर सकता है।

3. इमेजिंग टेस्ट - इमेजिंग टेस्ट में डॉक्टर आपकी हड्डियों और आंतरिक अंगों की जांच करेगा। इमेजिंग टेस्ट में एमआरआई, पोसिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे आदि शामिल हैं।

4. बायोप्सी - बायोप्सी में डॉक्टर लेबोरेट्री में टेस्ट करने के लिए आपकी कोशिकाओं का एक नमूना इक्खट्टा कर सकता है। आपके लिए किस तरह की बायोप्सी सही है ये आपके कैंसर और उसके स्थान पर निर्भर करता है।

कैंसर के इलाज –

1. सर्जरी -

सर्जरी का इस्तेमाल शरीर से कैंसर को निकालने के लिए किया जाता है।

2. रेडिएशन थेरेपी -

इस प्रक्रिया में कैंसर बनाने वाली कोशिकाओं को मारने और ट्यूमर को कम करने के लिए रेडिएशन की किरणों का इस्तेमाल किया जाता है।

3. कीमोथेरेपी -

इस इलाज में मरीज को कुछ दवाइयां दी जाती है जो सीधा शरीर में मौजूद कैंसर पर हमला करती हैं।

4. इम्यूनोथेरेपी -

यह इलाज शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है और कैंसर कोशिकाओं व ट्यूमर को कम करने में मदद करता है।

अन्य इलाज जैसे हार्मोन थेरेपी, स्टेम कोशिका प्रत्यारोपण, टारगेटेड थेरेपी, प्रेसिजन मेडिसिन शामिल हैं।

नोट - इस लेख पर सभी जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। बीमारी की जाँच और इलाज के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक की सलाह लें।


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