इस तरह जल्दी से सुलझाएं बच्चों के बीच झगड़ा (Is tarah jaldi se suljhaye bachho ke beech jhagda)


बहन भाइयों के बीच लड़ाई होना आम बात है। लेकिन जब ये लड़ाइयां जब ज्यादा बढ़ने लगें तो माता-पिताओं के लिए ये एक चिंता का विषय बन जाता है। अगर आप उन्हीं माता पिता में आते हैं जो अपने बच्चों की लड़ाइयों से परेशान है तो इस लेख की मदद से आप अपने बच्चों के बीच की लड़ाई रोक सकते हैं। तो चलिए इस लेख में हम आपको बताते हैं बहन भाइयों के बीच लड़ाई कैसे रोकें।

बच्चों के बीच समानता का व्यवहार करें - Bachho ke beech samanta ka vyavahr kare

अक्सर जब छोटा बच्चा घर में आता है तो बड़े बच्चे के लिए वो वक्त एक तनापूर्ण होता है, उसे लगता है कि मेरे छोटे भाई के आने के बाद मुझे प्यार नहीं मिलेगा। आप भी छोटे बच्चे के आने से अपने बड़े बच्चे और ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे में उसके मन में ईर्ष्या की भावना आने लगती है। बड़े बच्चे की दुविधा दूर करने के लिए उसके साथ एक क्वालिटी समय बिताएं। कभी भी बच्चों के बीच बिलकुल भी तुलना न करें।

अपने हर एक बच्चे के साथ समय बिताएं - Apne har ek bachhe ke sath samay bitaye

चाहे आपके बच्चे कितने भी बड़े हो जाए आपका हर एक बच्चा चाहता है कि उनके माता पिता उनके साथ अलग से कुछ क्वालिटी समय बिताएं। कोशिश करें आप अपने हर के बच्चे के साथ कुछ देर के लिए जरूर बैठें और उनसे उनके पूरे दिन की बातें सुनें। इससे वो अपनी भावनाओं को आपके सामने व्यक्त कर पाएंगे और उन्हें अपनी एहमियत का भी पता चलेगा।

बच्चों के बीच के झगडे उन्हें ही सुलझाने दें - Bachho ke beech ke jhagde unhe hi sujhane de

बच्चों को उनके आपसी लड़ाइयां खुद ही सुलझाने दें। उनके छोटे-छोटे मतभेदों पर अगर आप बीच में आएँगे तो वो एकदूसरे की जरूरतों का पता नहीं कर पाएंगे और उनमें समझौता करने की समझ नहीं आएगी। आप सिर्फ उनके बड़े-बड़े मतभेदों में ही बीच में आएं।

आपको हर बच्चे की बात सुननी चाहिए - Aapko har bachhe ki baat sunni chahiye

जब आप अपने बच्चों के झगड़े सुलझा रहे हो तो सिर्फ एक ही बच्चे की बात ही न सुनकर अपने दूसरे बच्चे की भी बराबर बात सुनें। एक ही बच्चे की बात सुनकर दूसरे बच्चे को डांटने से उसके मन में सबको लेकर गलत भावनाएं आ सकती हैं।

बच्चों को घर के नियमों का पालन करने की आदत डलवाएं - Bachho ko ghar ke niyamo ka palan karne ki aadat dalwaye 

बच्चों के लिए उनके माता पिता एक लिमिट सेट करते हैं। आप भी घर में एक खिलौना ला रहे हैं तो पहले बच्चों को समझा दें कि आपो ये खिलौना कितने समय के लिए मिलेगा। इसी तरह से अपने बनाये गए नियमों पर हमेशा कायम रहे, अगर आप एक समय के बाद ये नियम एक बच्चे के लिए तोड़ देते हैं तो बच्चों के बीच लड़ाइयां शुरू हो जाएंगी।


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