कुछ मजेदार बातें, हिमा दास के बारे में (Kuch majedaar bate, Hima Das ke bare me)


ग्लोबल प्रतियोगिताओं की 400 मीटर फर्राटा दौड़ में भारत को मेडल दिलाने वाली हिमा दास के बारे में जानें उनके परिवार, संघर्ष और सफलता से जुडी कुछ मजेदार बातें। तो चलिए इस लेख में आपको बताते हैं –

हिमा दास के बारे में जानकारी – Hima Das ke bare me jankari

हिमा पहली बार सुर्ख़ियों में 2018 में आयी थी। हिमा ने अंडर20 - एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड का खिताब जीता था। 400 मीटर दौड़ में वो पहली एथलेटिक महिला बनी जिसने गोल्ड जीता था।

2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में उन्होंने 400 मीटर रेस को 50.79 में पूरा करके नया भारतीय रिकॉर्ड बनाया था। इस रेस में हिमा ने सिल्वर जीता।

हिमा दास का जीवन परिचय - Hima Das ka jeevan parichay

हिमा असम के ढिंग कस्बे के पास के कांधुलीमारी गांव में पैदा हुई थी। उनके माता पिता जोनाली और रोंजित दास किसान हैं। हिमा अपने भाई बहनों में सबसे छोटी हैं और इसलिए उन्हें ढिंग एक्सप्रेस भी कहा जाता है। लेकिन हिमा की रुचि स्कूल के दिनों में दौड़ नहीं थी उनकी रुचि फूटबाल थी और वो भारत के लिए फूटबाल खेलना चाहती थी।

एक दिन हिमा के स्कूल के पीटी टीचर ने उन्हें दौड़ ध्यान देने के लिए कहा, जब हिमा ने खुद ये बात अपने में देखि तो उनकी भी रुचि रेस की तरफ बढ़ती चली गयी और फिर कभी उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हिमा दास का परिचय - Hima Das ka parichay

हिमा सामाजिक कार्यों में भी काफी आगे रहती हैं। उन्होंने 2013 में 'मोन जई' नामक एक एक्टिविस्ट ग्रुप बनाया था। 'मोन जई' का अर्थ है मेरी चाहत। हिमा सामाजिक कार्यों में भी काफी आगे रहती हैं। उन्होंने 2013 में 'मोन जई' नामक एक एक्टिविस्ट ग्रुप बनाया था। 'मोन जई' का अर्थ है मेरी चाहत। हिमा और हिमा के इस ग्रुप ने शराबंदी को बंद करने के लिए काफी काम किया है। 

हिमा का प्रेम न सिर्फ देश के लिए है बल्कि वो अपने राज्य असम से भी बेहद प्रेम करती हैं। हिमा जीत के बाद भारत का तिरंगा तो लहराती ही है, साथ ही असमिया गमछा भी उनके कंधे पर रहता है।

हिमा दास को पुरस्कार - Hima Das ko puraskar 

हिमा को 2018 में अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।


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