नियम हो पर बहु के लिए ही क्यों (Niyam ho par bahu ke liye hi kyon)


सोनिया की नई-नयी शादी हुई थी और उसे देखने के लिए ससुराल में बुआ जी आने वाली थी। उनके लिए घर में ज़ोरो शोरो से तैयारी चल रही थी। नए-नए पकवान बन रहे थे और और ये जितनी भी तैयारियां चल रही थी सिर्फ और सिर्फ घर की बहु सोनिया कर रही थी।

सोनिया को इतना काम में व्यस्त देखकर सास ने सोनिया से कहा "सोनिया बेटा बस कर काम तो होता रहेगा पहले तैयार हो जा बुआ जी आने वाली हैं।" सोनिया ने जवाब में कहा हां मम्मी जी मैं बस तैयार होने ही जा रही थी लेकिन क्या पहनूं समझ नहीं आ रहा।"

इतने में सोनिया की सास बोलती है कि सूट साड़ी जो तेरा मन करे तू वो पहन, मुझे भी तो देख मैंने भी सूट पहना है, अभी तो मैं जवान हूं।" ऐसा बोलकर सास बहु दोनों हंस पड़ती हैं।

बुआ जी पहुँच जाती हैं और बहु को ऐसे हंसता हुआ देख उन्हें एक आंख नहीं भाता, ऐसा सब देख वो अंदर आ जाती हैं।

बुआ जी को देख सोनिया उनके पैर छूने के लिए जाती है, "बुआ जी आप बैठिये मम्मी में नाश्ता पानी लगा देती हूं।" जब सोनिया चली जाती है तो बुआ जी सास से बोलती हैं क्यों पम्मी तुम्हारी बहु ने सीखा नहीं बड़ो के सामने सिर पर पल्लू रखते हैं या तुम उसे कुछ बोलती नहीं हो।

सास जवाब में बोलती हैं "सोनिया सिर में पल्लू रखे या न रखे मुझे इससे ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता, मैं अपनी सोनिया को बेटी की तरह लाड प्यार देती हूं, कभी हमने अपनी बेटी को ये सब चीज़ें नहीं सिखाई तो अपनी बहु के साथ में ऐसा व्यवाहर कभी नहीं करना चाहिए।"

ये सब सुनकर बुआ जी की आंखें झुक जाती हैं और सोनिया को सामने से बोलती हैं बेटा यहां बैठों "पम्मी मैंने अपनी बहु के साथ इस तरह व्यवाहर किया उसकी बंदिशे रोकी तभी आज मेरी और उसकी नहीं बनती, लेकिन तुम दोनों के बीच का रिश्ता देख मैं अभी अपनी बहु को फ़ोन करके साथ में खाना खाने का बोलती हूं।" 

ऐसा सुनकर सोनिया और उसकी सास मुस्कुरा देते हैं और सास सोनिया के सिर को चूमकर कहती हैं "जीती रहो और खुश रहो।"


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