पिता-पुत्र के बीच आए बदलाव को कैसे कम करें (Pita putra ke beech aaye badlav ko kaise kam kare)


समय बदला, समाज बदला और बदल गए पिता-पुत्र के रिश्ते। पहले रिश्तों में आदर और कुछ हद तक डर भी था लेकिन,अब ऐसा नहीं है। इस नए दौर में पिता-पुत्र के बीच रिश्तों में बदलाव की लहर महसूस की जा सकती है। इस नए दौर में सब कुछ संभव है, यहां तक की रिश्तों में बदलाव भी।

आजकल देखा जा रहा है कि पिता-पुत्र के रिश्ते में बहुत खुलापन आ गया है। पुराने जमाने में उनके बीच जो आदर और डर की दीवार थी, वह समय के साथ ढह गई है। पहले मां अक्सर पिता-पुत्र के बीच की कड़ी होती थीं और उन की बातें एक-दूसरे तक पहुंचाती थीं लेकिन इस नए दौर में दोनों अब एक फ्रैंडली रिलेशनशिप मेंटेन करने लगे हैं।

जमाना बहुत बदल गया है। बच्चों की खुशी किसमें है और वे क्या चाहते हैं, इस बात का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। आज बेटा अपनी दिशा चुनने के लिए स्वतंत्र है। पिता उसके सपने साकार करने में उसके साथ है। पिता-पुत्र के रिश्ते में जो पारदर्शिता होनी चाहिए वह अब दिखने लगी है।

 

1. डर पर जीत -

पुरानी पीढ़ी पर नजर डालें तो पता चलता है कि पिता की भूमिका किसी तानाशाह से कम नहीं होती थी। पिता की बात टालने की हिम्मत किसी में नहीं होती थी। पिता से डरते-डरते ही पूरा समय कट जाता था लेकिन अब समय बदल गया है और बदलते समय के साथ नींव पड़ी एक ऐसे नए रिश्ते की जिस में भय नहीं है। इस तरह पिता-पुत्र के बीच दूरियों खत्म हो गई हैं।

2. कैसा हो संबंध -

पिता-पुत्र संबंधों में पहले से काफी बदलाव आया है और यह उचित भी है। नए जमाने में पिता-पुत्र का संबंध तानाशाह कम और दोस्ताना ज्यादा है। पहले घर में पिता ही फैसले लिया करते थे, लेकिन अब बेटे से भी पूछा जाता है और उसकी राय को भी फैसलों में शुमार किया जाता है। पिता-पुत्र के रिश्ते में बदलाव के लिए मीडिया की भूमिका को भी हम नकार नहीं सकते हैं।

3. बातचीत में खुलापन -

आज पिता-पुत्र संबंधों में जो खुलापन आया है उससे रिश्ता मजबूत हुआ है। पहले ज्वाइंट फैमिली होती थी और पिता-पुत्र शर्म के कारण दूर ही रहते थे लेकिन आजकल पिता-पुत्र के बीच इतना खुलापन आ गया है कि वो साथ बैठकर ड्रिंक्स भी लेने लगे हैं। अब बेटा अपने पिता से अपनी गर्लफ्रैंड की बातें शेयर करने में शर्माता नहीं है।


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