जल्दी से सती के बारे में जानें
पर्सनालिटी (PERSONALITY)

जल्दी से सती के बारे में जानें

Jaldi se sati ke bare me jane

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भगवान शिव की पहली पत्नी सती थी। सती दक्ष की बेटी थी। दक्ष को भगवान शिव पसंद नहीं थे और इस कारणवश वो अपनी पुत्री का विवाह भगवान शिव से नहीं करना चाहते थे। उनके मना करने पर भी सती ने भगवान शिव से शादी कर ली। एक दिन यश राजा ने बड़े यज्ञ का आयोजन किया और सभी ऋषि और देवताओं को निमंत्रण दिया, लेकिन उस निमंत्रण में भगवान शिव को शामिल नहीं थे, क्योंकि उन्हें शिव कभी भी पसंद नहीं थे। सती यह अपमान सहन नहीं कर पाईं।

मां सती जब उस जगह पहुंची तो उन्होंने शिव के न बुलाने पर उनसे प्रश्न किया, लेकिन पिता को अपनी बेटी की पसंद को कभी पसंद नहीं किया था और इस वजह से वो भगवान शिव को सबके सामने भला बुरा कहने लगे। सती अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन न कर सकी और उन्होंने अपने आप को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर दिया। 

जब भगवान शिव को इस बारे में पता चला तो वो गुस्से में वहां पहुंच गए। नाराज शिव ने यज्ञ को नष्ट किया और दक्ष को मार डाला। शिव जी की तीसरी आंख खुलने का मतलब पूरे ब्रह्माण्ड का नष्ट होना। भगवान शिव ने तीसरी आंख खोली ली, लेकिन सभी देवताओं ने उनसे विनती कि आप शांत हो जाएं और धैर्य से काम लें। उनका क्रोध थोड़ा शांत हुआ और वो सती के मृत शरीर को कंधे पर निकल पड़े।

सती के शरीर के टुकड़े कुछ जगह गिरे जहां अब वो जगह शक्तिपीठ मानी जाती है। बाद में सती ने माँ पार्वती के रूप में हिमालय के घर पर जन्म लिया और कठोर तपस्या करके वो हमेशा के लिए शिव की धर्मपत्नी बन गयी।

मुख्य 9 शक्तिपीठ -

  1. कोलापुर महालक्ष्मी मंदिर - त्रिनेत्र गिरा
  2. नैना देवी मंदिर- आंखें गिरी
  3. अम्बाजी का मंदिर गुजरात- हृदय गिरा
  4. कालीघाट मंदिर कोलकाता- पांव की चार अंगुलियां गिरी
  5. हरसिद्धि माता मंदिर - उज्जैन बायां हाथ और होंठ यहां पर गिरे थे
  6. ज्वाला देवी मंदिर - सती की जीभ गिरी
  7. कालीघाट में माता के बाएं पैर का अँगूठा गिरा था.
  8. वाराणसी - विशालाक्षी उत्तरप्रदेश के काशी में मणि‍कर्णिक घाट पर माता के कान के कुंडल गिरे थे.
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